Tuesday, March 14, 2017

जुदाई शायरी

जमाने से नही तन्हाई से डरता हूँ
प्यार से नही रुसवाई से डरता हूँ
मिलने की उमंग तो बहुत होती है,
लेकिन मिलने के बाद भी तेरी जुदाई से डरता हूँ!

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चाँद की रातों में सारा जंहा सोता है,
किसी की यादो में कोई बदनसीब रोता है,
खुदा किसी को मोहब्बत पर फ़िदा ना करे,
अगर करे तो फिर किसी को जुदा ना करे!

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उनका भी हम दीदार करते है,
उनको भी हम दिल से याद करते है,
करे हम जब उनको हमारी जरूरत नही थी,
फिर भी हम उनको हर पल याद करते है!

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लेखक
जयसिंह नारेड़ा

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